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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में भारी कार्यभार, न्यायाधीश ने फैसला रखा सुरक्षित

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बढ़ते मामलों के दबाव की एक झलक हालिया सुनवाई के दौरान देखने को मिली। भारी कार्यभार के बीच एक महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई देर शाम तक चली, जिसके बाद न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित रखने का आदेश पारित किया।

सूत्रों के अनुसार, 24 फरवरी को एकल पीठ के समक्ष कुल 235 मामले सूचीबद्ध थे, जिनमें बड़ी संख्या में नए व नियमित प्रकरण शामिल थे। दिनभर सुनवाई के बाद संबंधित याचिका पर बहस शाम 7 बजे के बाद तक जारी रही। लंबी कार्यवाही के चलते न्यायालय ने तत्काल आदेश लिखे जाने के बजाय फैसला सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।

यह मामला ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) के आदेश से जुड़ा था, जिसे पूर्व में हाईकोर्ट ने निरस्त कर पुनः सुनवाई के निर्देश दिए थे। बाद में इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई के अवसर से जुड़े पहलुओं पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट को याचिका का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश दिया था।

निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखते हुए लखनऊ पीठ ने मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की। हालांकि, अत्यधिक कार्यभार और लंबी बहस के कारण उसी दिन निर्णय सुनाया नहीं जा सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश सुरक्षित रखा जा रहा है और विस्तृत निर्णय बाद में जारी किया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्यायिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है, जिससे समयबद्ध निस्तारण पर प्रभाव पड़ता है।

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