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Chamoli Cloudburst : आपदा के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के CM धामी ने दिए निर्देश!

Chamoli Cloudburst : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में दिल्ली से लौटने के बाद राज्य में आई प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों की गहन समीक्षा की।

उन्होंने विशेष रूप से थराली और स्यानाचट्टी में हुई घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रभावितों के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बेघर हुए लोगों को तुरंत अस्थायी आवास और सहायता प्रदान की जाए, और पुनर्वास प्रक्रिया को बिना किसी देरी के शुरू किया जाए।

Chamoli Cloudburst : त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास पर जोर

मुख्यमंत्री ने शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र का दौरा किया, जहां उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान, उन्होंने थराली में आपदा से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, "जो लोग बेघर हुए हैं, उनके लिए तात्कालिक रूप से सुरक्षित और आरामदायक आश्रय की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके साथ ही, उनके स्थायी पुनर्वास का कार्य भी तेजी से शुरू किया जाए।"

मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रभावित परिवारों को आवश्यक सामग्री और वित्तीय सहायता समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ मिले। उन्होंने राहत सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही, ताकि जरूरतमंदों को सर्वोत्तम सहायता मिल सके। इस संदर्भ में, उन्होंने चमोली के जिलाधिकारी की सराहना की, जिन्होंने थराली आपदा के दौरान मौके पर पहुंचकर त्वरित राहत और बेहतरीन प्रबंधन का प्रदर्शन किया।

धामी ने कहा कि अन्य आपदाग्रस्त क्षेत्रों में भी इसी प्रकार का प्रभावी समन्वय और तत्परता दिखानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में राज्य में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है, इसलिए सभी जिलाधिकारियों को पूरी तैयारी रखनी चाहिए। आपदा प्रबंधन से संबंधित उपकरण और सामग्री संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही उपलब्ध करा दी जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

Chamoli Cloudburst : नदियों के ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने राज्य में नदियों के किनारे बसी बस्तियों, कस्बों और शहरों की सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य की उन सभी नदियों में ड्रेजिंग (गाद निकालना) और चैनलाइजेशन (नदी के मार्ग को व्यवस्थित करना) का कार्य किया जाए, जिनके किनारे आबादी बसी हुई है।

उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर नदियों में गाद जमा होने के कारण जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के मानकों के अनुसार, ऐसी नदियों में ड्रेजिंग का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

इस संबंध में, उन्होंने सभी जिलों से जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया, जिसमें उन नदियों और क्षेत्रों की पहचान की जाए जहां ड्रेजिंग की आवश्यकता है। यह पहल न केवल भविष्य में आने वाली बाढ़ से बचाव में मदद करेगी, बल्कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भी बनाए रखने में सहायक होगी। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति राज्य की तैयारियों को मजबूत करेगा।

Chamoli Cloudburst : उच्च हिमालयी क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन

मुख्यमंत्री ने थराली, धराली और स्यानाचट्टी जैसी घटनाओं में समानता का उल्लेख करते हुए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की प्रकृति में एकरूपता दिखती है, इसलिए यह पता लगाना आवश्यक है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 'मोरेन' (हिमनद द्वारा लाई गई चट्टान और गाद) की मात्रा कितनी जमा हो रही है।

इस समस्या के मूल कारणों का पता लगाने के लिए, उन्होंने वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology), भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) जैसे प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक उच्च स्तरीय टीम गठित करने का निर्देश दिया।

इस टीम को इन घटनाओं के कारणों और भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के उपायों का अध्ययन करने का काम सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि सभी हिमालयी राज्यों में इस तरह का अध्ययन कराया जाए, ताकि पूरे हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की आपदाओं के जोखिम का आकलन किया जा सके। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण भविष्य में आपदाओं के प्रबंधन और रोकथाम के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

Chamoli Cloudburst : क्षति आकलन और रिपोर्टिंग की समय सीमा

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में उपस्थित सभी जिलाधिकारियों को 25 अगस्त तक आपदा से हुई क्षति का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजने का निर्देश दिया। यह रिपोर्ट थराली और धराली सहित राज्य के अन्य सभी आपदा प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर, सरकार पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के लिए आगे की योजना बनाएगी।

बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगौली सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। चमोली और उत्तरकाशी के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री के निर्देश और समीक्षा बैठक के बाद, यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार आपदा प्रभावितों को त्वरित राहत और पुनर्वास प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों पर भी काम कर रही है। यह प्रयास न केवल वर्तमान संकट से निपटने में मदद करेगा, बल्कि उत्तराखंड को भविष्य की प्राकृतिक चुनौतियों के लिए भी अधिक लचीला बनाएगा।

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