Jitendra Suicide Case : CM धामी ने जताया दुख, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा
Jitendra Suicide Case : उत्तराखंड के पौड़ी जिले में हुई एक बेहद दुखद घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। 21 अगस्त को 32 वर्षीय जितेंद्र सिंह नेगी की आत्महत्या ने न सिर्फ उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि इसने राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है।
जितेंद्र ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के एक युवा नेता हिमांशु चमोली और उनके कुछ साथियों पर गंभीर आरोप लगाए। इस घटना के बाद, जहां एक ओर प्रशासन पर तेजी से कार्रवाई करने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने सत्ताधारी पार्टी को घेरना शुरू कर दिया है।
Jitendra Suicide Case : आत्महत्या से पहले का वीडियो: एक अंतिम गुहार
जितेंद्र सिंह नेगी के निधन के बाद उनके द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। इस भावनात्मक वीडियो में, एक हताश व्यक्ति की अंतिम गुहार साफ सुनाई देती है।
जितेंद्र ने कहा कि वह एक जमीन से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से मानसिक उत्पीड़न झेल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमांशु चमोली और उनके कुछ साथी लगातार उन्हें परेशान कर रहे थे और उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे थे।
जितेंद्र ने वीडियो में बताया कि उन्होंने बार-बार न्याय के लिए गुहार लगाई, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। उन्होंने अपनी जान देने का फैसला किया ताकि उनके साथ हुई नाइंसाफी सबके सामने आ सके और उनके परिवार को न्याय मिल सके। इस वीडियो ने आम जनता के बीच गहरा रोष पैदा किया है, और कई लोग सोशल मीडिया पर न्याय की मांग कर रहे हैं।
Jitendra Suicide Case : मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और न्याय का भरोसा
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने मृतक जितेंद्र के परिजनों से फोन पर बात की और इस दुखद घड़ी में अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव न्याय दिलाया जाएगा।
एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, भले ही उसका राजनीतिक या सामाजिक कद कितना भी बड़ा क्यों न हो। उन्होंने पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून की सबसे सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मुख्यमंत्री का यह सीधा हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है।
Jitendra Suicide Case : प्रशासनिक कार्रवाई और गिरफ्तारी
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, पौड़ी पुलिस और जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया और एसएसपी लोकेश्वर सिंह ने व्यक्तिगत रूप से मृतक जितेंद्र के परिजनों से मुलाकात की।
अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से धैर्य बनाए रखने और प्रशासन पर भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने परिवार को अब तक की गई कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया और आश्वस्त किया कि जांच पूरी ईमानदारी से की जा रही है।
जितेंद्र के वीडियो में लगाए गए आरोपों के आधार पर, पौड़ी पुलिस ने तत्काल कदम उठाए। पुलिस ने देहरादून में छापेमारी कर हिमांशु चमोली समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इन सभी पर उत्पीड़न, धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी धाराओं के तहत जांच चल रही है। पुलिस का यह त्वरित कदम यह संदेश देता है कि कानून का राज स्थापित है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
Jitendra Suicide Case : विपक्ष का हमला और राजनीतिक घमासान
इस घटना ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मौके को भुनाते हुए भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया है कि हिमांशु चमोली मुख्यमंत्री धामी के करीबी माने जाते हैं, और यदि वीडियो में नाम आने के बावजूद इस मामले में तुरंत और सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह न्याय और कानून व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।
विपक्ष ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि जांच पर किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव न पड़े। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब तक किसी बड़ी एजेंसी, जैसे कि सीबीआई, को यह जांच नहीं सौंपी जाती, तब तक पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय मिलने की संभावना कम है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह घटना उत्तराखंड में बढ़ते राजनीतिक भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का एक दुखद उदाहरण है।
इस घटना ने न केवल एक व्यक्ति के जीवन का अंत किया है, बल्कि इसने समाज में पनप रही उस हताशा को भी उजागर किया है, जहां आम आदमी को शक्तिशाली लोगों के सामने बेबस महसूस होता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच कहां तक पहुंचती है और क्या वास्तव में दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा मिल पाती है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
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