UP : सीएम योगी की समीक्षा बैठक में गायब रहे 5 अधिकारी, कमिश्नर ने लिया एक्शन!
UP : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोरखपुर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें जिले के विकास कार्यों और निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर गहन चर्चा हुई। यह बैठक एनेक्सी भवन में आयोजित की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे हों।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कई कड़े निर्देश दिए और अधिकारियों को जवाबदेही के प्रति सचेत किया। इसी क्रम में, बैठक से अनुपस्थित रहे पाँच अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई, जिससे यह संदेश साफ हो गया कि सरकार विकास के एजेंडे में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।
UP : अधिकारियों पर हुई सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च-स्तरीय बैठक में पाँच वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया। मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने बैठक के तुरंत बाद इन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों में सी एंड डीएस यूनिट 14, 19 और 42 के परियोजना प्रबंधक, उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ (यूपीआरएनएसएस)-प्रथम के अधिशासी अभियंता और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य शामिल थे।
मंडलायुक्त ने इन सभी अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को भी पत्र भेजा गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों के प्रति जिम्मेदार रहें और सरकार की विकास प्राथमिकताओं में सक्रिय रूप से भाग लें। यह घटना एक स्पष्ट चेतावनी है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रही परियोजनाओं की निगरानी में किसी भी प्रकार की ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
UP : विकास परियोजनाओं और बाढ़ नियंत्रण पर फोकस
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से निर्माणाधीन पुलों और सड़कों के कार्य को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भटहट, बांसगांव, और देवरिया बाईपास जैसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का काम समय पर पूरा हो, ताकि क्षेत्र की यातायात व्यवस्था सुगम हो सके। इन परियोजनाओं का पूरा होना न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने आगामी बाढ़ के मौसम को देखते हुए बचाव और राहत कार्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग समय रहते सभी आवश्यक इंतजाम पूरे करें।
बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की पहचान, राहत शिविरों की स्थापना और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन सुरक्षा सर्वोपरि है और इस संबंध में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
UP : स्वास्थ्य और जागरूकता अभियानों पर विशेष बल
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंता जाहिर की और अधिकारियों को इस संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने जेई/एईएस (जापानी इंसेफेलाइटिस/एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया।
इन बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए आम जनता को इनके लक्षण, बचाव के उपाय और उपचार के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को विभिन्न माध्यमों से जानकारी प्रसारित करने का निर्देश दिया।
बाल वाटिकाओं के संबंध में, मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि जनप्रतिनिधि इन स्थानों का नियमित दौरा करें। इस पहल का उद्देश्य बाल वाटिकाओं के रखरखाव और गुणवत्ता में सुधार लाना है। जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से इन स्थानों के विकास में तेजी आएगी और बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एसटीपी का निर्माण करने वाली संस्था को 10 वर्षों तक उसके संचालन का जिम्मा सौंपने का प्रस्ताव तैयार करें। इस कदम से न सिर्फ एसटीपी की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि उसके दीर्घकालिक संचालन में भी स्थिरता आएगी।
UP : निगरानी और जवाबदेही पर सख्त रुख
बैठक के अंत में, मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभागीय प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे निर्माण और विकास कार्यों की साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक समीक्षा नियमित रूप से करें।
इस तरह की निगरानी से परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सकेगा और कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सभी विभाग अपने-अपने कार्यों की नियमित निगरानी करें और उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करें।
यह समीक्षा बैठक न केवल गोरखपुर के विकास कार्यों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हुई, बल्कि इसने अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश भी दिया कि सरकार अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता को बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह रुख स्पष्ट करता है कि राज्य के विकास के लिए हर स्तर पर जवाबदेही और समर्पण की आवश्यकता है।
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