विधानसभा में बड़ी घोषणा: शिक्षामित्र और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी
लखनऊ- उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की। इस फैसले के साथ ही वर्षों से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे शिक्षामित्रों को बड़ी राहत मिली है। नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी।
नौ साल बाद मिली राहत
साल 2017 में अदालत के फैसले के बाद शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया गया था, जिससे उनका वेतन 35-40 हजार रुपये से घटकर 10 हजार रुपये मानदेय पर आ गया था। तब से वे लगातार मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार ने उनका मानदेय लगभग दोगुना करने का निर्णय लिया है, जिससे करीब 1.43 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
योजना की पृष्ठभूमि
शिक्षामित्र योजना की शुरुआत 26 मई 1999 को सर्व शिक्षा अभियान के तहत की गई थी। प्रारंभ में सीमित संख्या में नियुक्तियां हुईं, लेकिन 2005-06 के बाद इनकी संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। बाद में दो वर्षीय प्रशिक्षण के बाद उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
हालांकि, टीईटी अर्हता से जुड़े विवाद के चलते मामला अदालत पहुंचा और 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन निरस्त किए जाने के बाद वे फिर मानदेय व्यवस्था में लौट आए।
अनुदेशकों को भी फायदा
प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में कला, विज्ञान, कंप्यूटर, खेलकूद जैसे विषयों के लिए वर्ष 2013-14 में लगभग 25 हजार अनुदेशक नियुक्त किए गए थे। पहले उनका मानदेय 7 हजार रुपये था, जिसे बाद में बढ़ाकर 9 हजार किया गया। अब इसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये करने की घोषणा की गई है।
अन्य सुविधाएं भी
राज्य सरकार ने हाल ही में शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शामिल किया है। इससे उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का भी लाभ मिलेगा।
संगठनों ने किया स्वागत
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शिक्षामित्रों के जीवन स्तर में सुधार आएगा और वे और अधिक समर्पण के साथ शिक्षण कार्य कर सकेंगे।
सरकार के इस फैसले को शिक्षामित्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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